श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.18.58 
‘पावनादि’ सब कुण्डे स्नान करिया ।
लोकेरे पुछिल, पर्वत - उपरे याञा ॥58॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पावन झील से आरंभ करके सभी प्रसिद्ध सरोवरों में स्नान किया। तत्पश्चात वे एक पहाड़ी पर चढ़े और लोगों से बातें कीं।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu bathed in all the famous ponds, including the holy lake. He then climbed a mountain and inquired from the people.
तात्पर्य
पाम्बन-सरवर का वर्णन मथुरा-माहात्म्य में इस प्रकार है:

पाबने सरसी स्नात्वा कृष्णं नन्दीश्वरे गिराउ।

दृष्ट्वा नन्दं यशोदां च सर्वभिष्टमवाप्नुयात्।।

“जो कोई नंदीश्वर पर्वत के समीप स्थित पाबन सरोवर में स्नान करेगा, वहां वह नंद और यशोदा के साथ भगवान कृष्ण के दर्शन करेगा और अपनी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करेगा।”

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)