श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.18.49 
सङ्गे गोपाल - भट्ट, दास - रघुनाथ ।
रघुनाथ - भट्ट - गोसाञि, आर लोकनाथ ॥49॥
 
 
अनुवाद
जब रूप गोस्वामी मथुरा में रुके, तो उनके साथ गोपाल भट्ट गोस्वामी, रघुनाथ दास गोस्वामी, रघुनाथ भट्ट गोस्वामी और लोकनाथ दास गोस्वामी भी थे।
 
When Rupa Goswami stayed in Mathura, he was accompanied by Gopal Bhatta Goswami, Raghunatha Dasa Goswami, Raghunatha Bhatta Goswami and Lokanatha Dasa Goswami.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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