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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.18.47 
म्लेच्छ - भये आइला गोपाल मथुरा - नगरे ।
एक - मास रहिल विठ्ठलेश्वर - घरे ॥47॥
 
 
अनुवाद
मुसलमानों के भय से गोपाल मथुरा चले गये, जहाँ वे विट्ठलेश्वर के घर में पूरे एक महीने तक रहे।
 
Due to fear of Muslims, Gopal went to Mathura, where he stayed in the temple of Vitthaleshwar for a whole month.
तात्पर्य
जब दो भाई श्रील रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी वृंदावन आये, तो उन्होंने वहीं रहना निश्चय किया। श्री चैतन्य महाप्रभु के उदाहरण का अनुसरण करते हुए, उन्होंने पहाड़ी पर नहीं चढ़ने का निश्चय किया क्योंकि वे उसे कृष्ण से भिन्न नहीं मानते थे, जो परमेश्वर थे। किसी बहाने गोपाल देवता ने श्री चैतन्य महाप्रभु का पहाड़ी के नीचे दर्शन किया। इसी प्रकार गोपाल ने श्रील रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी का भी पक्ष लिया। अपने वृद्धावस्था के दौरान जब रूप गोस्वामी अशक्तता के कारण गोवर्धन पहाड़ी पर नहीं जा सकते थे, गोपाल कृपा करके मथुरा आये और विठ्ठलेश्वर के घर एक महीने तक रहे। यह तब था जब श्रील रूप गोस्वामी गोपाल के सौंदर्य को अपने दिल की संतुष्टि के लिए देख पाए।

भक्ति-रत्नाकर (पांचवीं लहर) में विठ्ठलेश्वर से संबंधित निम्नलिखित वर्णन दिया गया है:

विठ्ठलेर सेवा कृष्ण-चैतन्य-विग्रह

ताहार दर्शने हैला परम आग्रह

श्री-विठ्ठलनाथ – भट्ट-वल्लभ-तनय

करिला यितेका प्रीति कहिले ना हया

गाठौली-ग्रामे गोपाल आया 'छला' करी'

ताँरे देखी' नृत्य-गीते मग्न गौरहरी

श्री-दास-गोस्वामी आदि परामर्श करी'

श्री-विठ्ठलेश्वरे कैला सेवा-अधिकारी

पिता श्री-वल्लभ-भट्ट ताँरा अदर्शने

कते-दिन मथुराय चिलैना निर्जने

श्री वल्लभ भट्ट के दो बेटे थे। बड़े, गोपीनाथ, का जन्म 1432 शकाब्द ईस्वी (1510 ईस्वी) में हुआ था, और छोटे, विट्ठलेश्वर, का जन्म 1437 में (1515 ईस्वी) हुआ था और उनकी मृत्यु 1507 (1585 ईस्वी) में हुई। विट्ठलेश्वर के सात बेटे थे: गिरधर, गोविंद, बालकृष्ण, गोकुलेश, रघुनाथ, यदुनाथ और घनश्यामा। विट्ठलेश्वर ने अपने पिता की कई अधूरी किताबें पूरी कीं, जिसमें वेदांत-सूत्र पर उनकी टीका, श्रीमद-भागवतम पर सुबोधिनी टीका, विद्वान-मंडन, शृंगार-रस-मंडन और न्यासादेश-विवरण शामिल थे। विट्ठलेश्वर के जन्म से पहले श्री चैतन्य महाप्रभु वृंदावन गए थे। जैसा कि पहले बताया गया है, उस वक्त श्रील रूप गोस्वामी बहुत बूढ़े थे जब गोपाल विट्ठलेश्वर के घर पर रुके थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)