भक्ति-रत्नाकर (पांचवीं लहर) में विठ्ठलेश्वर से संबंधित निम्नलिखित वर्णन दिया गया है:
विठ्ठलेर सेवा कृष्ण-चैतन्य-विग्रह
ताहार दर्शने हैला परम आग्रह
श्री-विठ्ठलनाथ – भट्ट-वल्लभ-तनय
करिला यितेका प्रीति कहिले ना हया
गाठौली-ग्रामे गोपाल आया 'छला' करी'
ताँरे देखी' नृत्य-गीते मग्न गौरहरी
श्री-दास-गोस्वामी आदि परामर्श करी'
श्री-विठ्ठलेश्वरे कैला सेवा-अधिकारी
पिता श्री-वल्लभ-भट्ट ताँरा अदर्शने
कते-दिन मथुराय चिलैना निर्जने
श्री वल्लभ भट्ट के दो बेटे थे। बड़े, गोपीनाथ, का जन्म 1432 शकाब्द ईस्वी (1510 ईस्वी) में हुआ था, और छोटे, विट्ठलेश्वर, का जन्म 1437 में (1515 ईस्वी) हुआ था और उनकी मृत्यु 1507 (1585 ईस्वी) में हुई। विट्ठलेश्वर के सात बेटे थे: गिरधर, गोविंद, बालकृष्ण, गोकुलेश, रघुनाथ, यदुनाथ और घनश्यामा। विट्ठलेश्वर ने अपने पिता की कई अधूरी किताबें पूरी कीं, जिसमें वेदांत-सूत्र पर उनकी टीका, श्रीमद-भागवतम पर सुबोधिनी टीका, विद्वान-मंडन, शृंगार-रस-मंडन और न्यासादेश-विवरण शामिल थे। विट्ठलेश्वर के जन्म से पहले श्री चैतन्य महाप्रभु वृंदावन गए थे। जैसा कि पहले बताया गया है, उस वक्त श्रील रूप गोस्वामी बहुत बूढ़े थे जब गोपाल विट्ठलेश्वर के घर पर रुके थे।
