श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.18.4 
आरिटे राधा - कुण्ड - वार्ता पुछे लोक - स्थाने ।
केह नाहि कहे, सङ्गेर ब्राह्मण ना जाने ॥4॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्थानीय लोगों से पूछा, “राधा-कुण्ड कहाँ है?” कोई भी उन्हें नहीं बता सका, और उनके साथ आए ब्राह्मण को भी नहीं पता था।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked the local people where Radha Kunda was, but no one could tell him. Even the Brahmin who lived with him did not know.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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