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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.18.37 
गोपालेर सौन्दर्य दे खि’ प्रभुर आवेश ।
एइ श्लोक प ड़ि’ नाचे, हैल दिन - शेष ॥37॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही भगवान ने गोपाल विग्रह की सुन्दरता देखी, वे तुरंत प्रेम से अभिभूत हो गए और उन्होंने निम्नलिखित श्लोक का पाठ किया। फिर वे दिन समाप्त होने तक कीर्तन और नृत्य करते रहे।
 
Upon seeing the beauty of the Gopala Deity, Mahaprabhu was overcome with love and recited the following verse. He then continued chanting and dancing until sunset.
तात्पर्य

श्रील भक्तिसिधान्त सरस्वती ठाकुर गोविंद-कुंड के बारे में निम्न जानकारी देते हैं। गोवर्धन पहाड़ी पर आनीयोरा नामक गाँव है, जो कि पैठा गाँव से थोड़ी दूरी पर है। गोविंद-कुंड यहाँ के नज़दीक ही स्थित है, और वहाँ गोविंद और बलदेव के दो मंदिर हैं। कुछ लोगों के अनुसार, इस झील की खुदाई रानी पद्मावती ने करवाई थी। भक्ति-रत्नाकर (पंचम तरंग) में, निम्न कथन मिलता है:

एइ श्री-गोविंद-कुंड-महिमा अनेक

एथा इंद्र कैला गोविंदरा अभिषेक

“गोविंद-कुंड अपनी कई आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महिमामंडित है। यहीं पर भगवान गोविंद द्वारा पराजित होने पर इंद्र ने उनसे प्रार्थना की और उन्हें नहलाया था।" स्तवावली (व्रज-विलास-स्तव 74) नामक पुस्तक में, निम्नलिखित श्लोक मिलता है:

नीचैः प्रौढ-भयात् स्वयं सुर-पतिः पादौ विधृत्येह यैः

 स्वर-गंगा-सलिलैः चकार सुरभी-द्वाराभिषेक-उत्सवम्

गोविंदस्य नवम गवां अधिपता राज्ये स्फुटं कौतुकात्

 तैर यत् प्राादुरुभूत सदा स्फुटु तद् गोविंद-कुंडं दृशोः

"अत्यधिक भय के कारण विनम्रतापूर्वक, इंद्र ने भगवान कृष्ण के चरण कमलों को पकड़ लिया और एक सुरभी गाय के साथ, स्वर्ग की गंगा नदी के जल से उनका राज्याभिषेक समारोह सम्पादित किया। इस प्रकार भगवान कृष्ण का गौं पर राजत्व शानदार रूप से प्रकट हुआ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि गोविंद-कुंड, जो उस राज्याभिषेक स्नान से बना झील है, वह सदा मेरी आँखों के सामने प्रकट हो।"

इसके अतिरिक्त, मथुरा-खंड में लिखा है:

यत्र अभिषिक्तो भगवान मघोना यदु-वैरिणा

गोविंद-कुंडं तज्-जातं स्नान-मात्रेण मोक्ष-दम्

"केवल गोविंद-कुंड में स्नान करने से ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस झील का निर्माण तब हुआ जब भगवान श्री कृष्ण को भगवान इंद्र द्वारा नहलाया गया था।"

गाँठुली-ग्राम, बिलाचु और गोपाल-पुरा नामक दो गाँवों के नज़दीक स्थित है। किवदंतियों के अनुसार, राधा और कृष्ण की पहली मुलाकात यहीं पर हुई थी। भक्ति-रत्नाकर (पंचम तरंग) में, लिखा है, सखी दुन्ह वास्त्रे गाँठी दिला संगोपने: "दोनों ने अपने बाहरी वस्त्रों को एक साथ बाँधकर खुद को छुपा लिया।" यह भी कहा गया है, फागुया लैया केहा गाँठी खुलि' दिला: "उन्होंने एक फागुया साथ लेकर गाँठ खोल दी।" इसी वजह से इस गाँव को गाँठुली के नाम से जाना जाता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)