ऐछे लीला करे प्रभु श्री - कृष्ण - चैतन्य ।
‘पश्चिमे’ आसिया कैल यवनादि धन्य ॥213॥
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अनुवाद
इस प्रकार भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपनी लीलाएँ कीं। भारत के पश्चिमी भाग में आकर उन्होंने यवनों और म्लेच्छों को सौभाग्य प्रदान किया।
In this way, Sri Chaitanya Mahaprabhu performed his pastimes. He came to the western part of India and brought good fortune to the Yavanas and Mlechhas.
तात्पर्य
यावन शब्द का अर्थ है "मांसाहारी"। मांसाहारी समुदाय से जुड़े किसी भी व्यक्ति को यावन कहा जाता है। जो व्यक्ति वैदिक नियमों का कड़ाई से पालन नहीं करता है उसे म्लेच्छ कहा जाता है। ये शब्द किसी विशेष व्यक्ति का उल्लेख नहीं करते हैं। भले ही कोई व्यक्ति ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र परिवार में जन्म ले, यदि वह कठोरता से नियमित सिद्धांतों का पालन नहीं करता है या यदि वह मांस खाता है, तो वह म्लेच्छ या यावन है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥