Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.18.190 
तोमार शास्त्रे कहे शेषे ‘एक - इ ईश्व र’ ।
‘सर्वैश्वर्य - पूर्ण तेंहो - श्याम - कलेवर ॥190॥
 
 
अनुवाद
"कुरान इस तथ्य को स्वीकार करता है कि अंततः केवल एक ही ईश्वर है। वह ऐश्वर्य से परिपूर्ण है, और उसका शारीरिक रंग श्यामवर्ण है।"
 
The Quran acknowledges the fact that ultimately there is only one God. He is full of majesty and has a dark complexion.
तात्पर्य
मुसलमानों का प्रकाशित धर्मग्रंथ कुरान है। सूफी नामक एक मुस्लिम संप्रदाय है। सूफी अद्वैतवाद स्वीकार करते हैं, जीवित इकाई की परम सत्य के साथ एकता में विश्वास करते हुए। उनका सर्वोच्च नारा 'अनलहक' है। सूफी संप्रदाय निश्चित रूप से शंकराचार्य के अद्वैतवादियों से ही निकला था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)