श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  2.18.166 
तबे सेइ पाठान चारि - जनेरे बाँधिल ।
काटिते चाहे, गौड़िया सब काँपिते लागिल ॥166॥
 
 
अनुवाद
यह सोचकर पठान सैनिकों ने उन चारों को पकड़कर उन्हें मार डालने का निश्चय किया। इससे दोनों बंगाली काँपने लगे।
 
Thinking this, the Pathan soldiers captured the four men and decided to kill them. This caused the two Bengalis to tremble.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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