एक - दिन सेइ अक्रूर - घाटेर उपरे ।
वसि’ महाप्रभु किछु करेन विचारे ॥135॥
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अनुवाद
एक दिन श्री चैतन्य महाप्रभु अक्रूर तीर्थ के स्नान घाट पर बैठे थे और निम्नलिखित विचार सोच रहे थे।
One day Sri Chaitanya Mahaprabhu sat on the bathing ghat of Akrura Tirtha and started thinking like this.
तात्पर्य
अकृर-तीर्थ वृंदावन और मथुरा के मध्य मार्ग पर स्थित है। जब कृष्ण और बलराम को अक्रूर मथुरा ले जा रहे थे तब भगवान ने इस स्थान पर विश्राम किया और यमुना में स्नान किया। जब कृष्ण और बलराम ने स्नान किया, अक्रूर ने जल के भीतर सम्पूर्ण वैकुंठ लोक को देखा। वृंदावन के निवासियों ने भी जल के भीतर वैकुंठ लोक को देखा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥