श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.18.109 
प्रभु कहे, - ‘काहाँ पाइला कृष्ण दरशन?’ ।
लोक कहे , - ’सन्न्यासी तुमि जङ्गम - नारायण ॥109॥
 
 
अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने उनसे पूछा, "तुमने कृष्ण को प्रत्यक्ष रूप से कहाँ देखा है?"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu asked them, “Where have you seen Krishna in person?” The people replied, “You are a sannyasi, therefore you are the walking Narayana (Jangama-Narayana).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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