संसारि-चिन्तामणि रत यस्मात
तारकं सज्जन-कर्णिकायाम्
शिवोऽभिधत्ते सह-सान्ताकाले
तदगीयतेऽसौ मणि-कर्णिकेति
मुक्ति-लक्ष्मी महा-पीठ-मणिस तच्चरणाब्जयो:
कर्णिकेयं ततो प्राचुर्यम् यां जना मणि-कर्णिकाम
काशी-खंड के इस मार्ग के अनुसार, जो व्यक्ति मणिकर्णिका में अपना शरीर त्यागता है वह केवल भगवान शिव के नाम का स्मरण करके मुक्त हो जाता है।
