श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.17.8 
दुइ - जन कहे , - ’तुमि ईश्वर ‘स्वतन्त्र’ ।
येइ इच्छा, सेइ करिबा, नह ‘परतन्त्र’ ॥8॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर रामानंद राय और स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, आप पूर्णतः स्वतंत्र हैं। चूँकि आप किसी पर निर्भर नहीं हैं, इसलिए आप जो चाहें करेंगे।"
 
Hearing this, Ramanand Rai and Swarup Damodara Goswami said, "O Lord, you are completely independent. Since you are not dependent on anyone, you will do whatever you wish.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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