श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.17.76 
भट्टाचार्ये आलिङ्गिया ताँहारे कहिल ।
‘तोमार प्रसादे आमि एत सुख पाइल’ ॥76॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब बलभद्र भट्टाचार्य को गले लगाया और उनसे कहा, "यह केवल आपकी कृपा है कि मैं अब इतना खुश हूँ।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu embraced Balabhadra Bhattacharya and said to him, “It is only by your grace that I am so happy now.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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