भट्टाचार्य सेवा करे, स्नेहे यैछे ‘दास’ ।
ताँर विप्र वहे जल - पात्र - बहिर्वास ॥65॥
अनुवाद
बलभद्र भट्टाचार्य भगवान के प्रति इतने स्नेही थे कि वे एक साधारण सेवक की तरह उनकी सेवा कर रहे थे। उनके सहायक ब्राह्मण ने जलपात्र और वस्त्र धारण किए हुए थे।
Balabhadra Bhattacharya loved Mahaprabhu so much that he continued to serve him like a slave.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)