"वृन्दावन भगवान का दिव्य धाम है। वहाँ न भूख है, न क्रोध, न प्यास। यद्यपि स्वभावतः शत्रुतापूर्ण, फिर भी मनुष्य और हिंसक पशु वहाँ दिव्य मित्रता से रहते हैं।"
"Vrindavan is the divine abode of the Lord. There is no hunger, no anger, no thirst. Although there is a natural hostility between humans and predatory animals, they live there in a divinely harmonious harmony."
तात्पर्य
इसका कथन श्रीमद् भागवतम् (10.13.60) में मिलता है। श्री कृष्ण के गोप बालकों एवं बछड़ों को चुरा कर भगवान ब्रह्मा ने उन्हें सुलाकर छिपा दिया। ब्रह्मा थोड़े समय बाद लौटे ताकि कृष्ण की स्थिति देख सकें। जब उन्होंने देखा कि कृष्ण अपने गोप मित्रों और जानवरों के साथ अपनी लीला में तल्लीन हैं और बिल्कुल विचलित नहीं हुए हैं तो भगवान ब्रह्मा ने वृंदावन के अलौकिक ऐश्वर्य की प्रशंसा की।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥