vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा
»
श्लोक 32
श्लोक
2.17.32
सेइ जल - बिन्दु - कणा लागे यार गाय ।
सेइ ‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ कहे, प्रेमे नाचे, गाय ॥32॥
अनुवाद
जिन हाथियों के शरीर भगवान द्वारा छिड़के गए जल से स्पर्शित हुए, वे “कृष्ण! कृष्ण!” का जाप करने लगे और आनंद में नाचने और गाने लगे।
The elephants on whose bodies the water sprinkled by Mahaprabhu fell, started saying, "Krishna! Krishna!" and started dancing and singing in love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×