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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  2.17.193 
मधु - वन, ताल, कुमुद, बहुला - वन गेला ।
ताहाँ ताहाँ स्नान करि’ प्रेमाविष्ट हैला ॥193॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने मधुवन, तलवन, कुमुदवन और बहुलावन सहित विभिन्न वनों का भ्रमण किया। वे जहाँ भी गए, वहाँ उन्होंने बड़े आनंदित प्रेम से स्नान किया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu visited various forests, including Madhuvana, Talavana, Kumudavana, and Bahulavana. Wherever he went, he bathed with great devotion.
तात्पर्य
शाब्दिक रूप से "वना" शब्द का अर्थ "वन" है। वृंदावन उस वन का नाम है जहाँ श्रीमती वृंदादेवी ( तुलसीदेवी ) बहुतायत में उगते हैं। वास्तव में यह एक वन नहीं है जैसा कि हम आम तौर पर एक वन को समझते हैं, क्योंकि यह बहुत घनी हरी वनस्पतियों से भरा है। वृंदावन में ऐसे बारह वन हैं। कुछ यमुना के पश्चिमी भाग में स्थित हैं, और अन्य पूर्वी भाग में हैं। पूर्वी भाग में स्थित वन भद्रवन, बिल्ववन, लौहवन, भांडीरवन और महावन हैं। पश्चिमी भाग में मधुवन, तालवन, कुमुदवन, बहुलावन, काम्यवन, खदिरवन और वृंदावन हैं। ये वृंदावन क्षेत्र के बारह वन हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)