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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.17.179 
यद्यपि ‘सनोड़िया’ हय सेइत ब्राह्मण ।
सनोड़िया - घरे स न्न्यासी ना करे भोजन ॥179॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण सनोदिया ब्राह्मण समुदाय से संबंधित था, और एक संन्यासी ऐसे ब्राह्मण से भोजन स्वीकार नहीं करता है।
 
That Brahmin was of Sanodia caste and a Sanyasi does not eat food at the house of such a Brahmin.
तात्पर्य
उत्तर-पश्चिमी भारत में, वैश्यों को विभिन्न उपखंडों में विभाजित किया गया है। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर बताते हैं कि उन्हें अग्रवाल, कालवार और सानवाड़ा के रूप में विभाजित किया गया है। उनमें से, अग्रवालों को प्रथम श्रेणी के वैश्य कहा जाता है, और कालवार और सानवाड़ों को उनके व्यावसायिक ह्रास के कारण निम्न माना जाता है। कालवार आमतौर पर शराब और अन्य नशीले पदार्थ लेते हैं। हालाँकि वे वैश्य हैं, उन्हें निम्न वर्ग का माना जाता है। कालवारों और सानवाड़ों का मार्गदर्शन करने वाले पुजारियों को सनोदिया ब्राह्मण कहा जाता है। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर कहते हैं कि बंगाल में सानोयड़ा शब्द सुवर्ण-वणिक को इंगित करता है। बंगाल में ऐसे पुजारी हैं जो सुवर्ण-वणिक समुदाय का मार्गदर्शन करते हैं, जिसे भी निम्न वर्ग माना जाता है। सानवाड़ा और सुवर्ण-वणिकों में थोड़ा अंतर है। आमतौर पर सुवर्ण-वणिक सोने और चांदी का व्यापार करने वाले बैंकर होते हैं। पश्चिमी भारत में, अग्रवाल भी बैंकिंग पेशे से संबंधित हैं। यह सुवर्ण-वणिक या अग्रवाल समुदाय का मूल व्यवसाय है। ऐतिहासिक रूप से, अग्रवाल अयोध्या नामक ऊपरी देश से आए थे, और सुवर्ण-वणिक समुदाय भी अयोध्या से आया था। इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि सुवर्ण-वणिक और अग्रवाल एक ही समुदाय के हैं। सनोदिया ब्राह्मण कालवारों और सानवाड़ों के मार्गदर्शक थे। इसलिए उन्हें निम्न श्रेणी के ब्राह्मण माना जाता है, और एक संन्यासी को उनसे भिक्षा या भोजन नहीं लेने दिया जाता है। हालाँकि, श्री चैतन्य महाप्रभु ने सनोदिया ब्राह्मण द्वारा पकाए गए भोजन को केवल इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वह माधवेंद्र पुरी के समुदाय से संबंधित था। श्रील माधवेंद्र पुरी ईश्वर पुरी के आध्यात्मिक गुरु थे, जो श्री चैतन्य महाप्रभु के आध्यात्मिक गुरु थे। इस प्रकार एक आध्यात्मिक संबंध आध्यात्मिक मंच पर स्थापित होता है, भौतिक हीनता या श्रेष्ठता पर विचार किए बिना।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)