श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  2.17.171 
शुनिया विस्मित विप्र कहे भय पाञा ।
ऐछे बात् कह केने सन्न्यासी हञा ॥171॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर ब्राह्मण भयभीत हो गया और बोला, "आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? आप तो संन्यासी हैं।"
 
Hearing this, the Brahmin became frightened. Then he said, “Why are you saying this? You are a monk.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)