श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  2.17.166 
विप्र कहे , - ’श्रीपाद श्री - माधवेन्द्र - पुरी ।
भ्रमिते भ्रमिते आइला मथुरा - नगरी ॥166॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने उत्तर दिया, “परम पूज्य श्रील माधवेन्द्र पुरी मथुरा नगरी में भ्रमण के दौरान आये थे।
 
That Brahmin said, “Shripad Madhavendra Puri came to Mathura city during his tour.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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