| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा » श्लोक 154 |
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| | | | श्लोक 2.17.154  | पथे याहाँ याहाँ हय यमुना - दर्शन ।
ताहाँ झाँप दिया प ड़े प्रेमे अचेतन ॥154॥ | | | | | | | अनुवाद | | जब भगवान मथुरा जा रहे थे, तो वे कई बार यमुना नदी के पार आये और जैसे ही उन्होंने यमुना नदी को देखा, वे तुरन्त उसमें कूद पड़े और कृष्ण के प्रेम के आनंद में जल में अचेत होकर गिर पड़े। | | | | While going to Mathura, Mahaprabhu came across the Yamuna river many times and as soon as he saw the river, he would immediately jump into it and become unconscious in the love of Krishna inside the water. | | ✨ ai-generated | | |
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