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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.17.15 
स्वरूप कहे , - एइ बलभद्र - भट्टाचार्य ।
तोमाते सु - स्निग्ध बड़, पण्डित, साधु, आर्य ॥15॥
 
 
अनुवाद
तब स्वरूप दामोदर ने कहा, "यहाँ बलभद्र भट्टाचार्य हैं, जो आपसे बहुत प्रेम करते हैं। वे एक ईमानदार, विद्वान हैं और आध्यात्मिक चेतना में उन्नत हैं।
 
Then Svarupa Damodara said, "This is Balabhadra Bhattacharya. He has great affection for you. He is of virtuous character, learned, and advanced in spiritual consciousness.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु एक नए मनुष्य को चाहते थे, काला कृष्णदास जैसे व्यक्ति को नहीं जो स्त्रियों के पीछे पड़ जाते थे। इसलिए स्वरूप दामोदर ने तुरंत बालाभाद्र भट्टाचार्य नामक एक नए ब्राह्मण की ओर इशारा किया। श्री स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने इस व्यक्ति का बहुत गहन अध्ययन किया था और पाया था कि उसे श्री चैतन्य महाप्रभु से बहुत प्यार था। वह न केवल प्रभु से प्यार करता था, बल्कि वह विद्वान और ईमानदार भी था। वह द्वेषपूर्ण नहीं था और कृष्ण चेतना में उन्नत था। एक बंगाली कहावत के अनुसार, अति भक्ति चोररा लक्षण : “बहुत अधिक भक्ति एक चोर का लक्षण है।” एक व्यक्ति जो अपने आप को एक महान भक्त मानता है लेकिन मानसिक रूप से किसी और चीज़ के बारे में सोच रहा है, वह द्वेषपूर्ण है। जो द्वेषपूर्ण नहीं होता उसे साधु कहा जाता है। स्वरूप दामोदर ने तुरंत यह बताया कि बालाभाद्र भट्टाचार्य भगवान के साथ जाने के लिए काफी फिट थे क्योंकि वह एक विद्वान विद्वान थे और सरल थे और श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु से बहुत प्यार करते थे। वह कृष्ण चेतना में भी उन्नत थे; इसलिए उन्हें भगवान के साथ व्यक्तिगत सेवक के रूप में जाने के लिए उपयुक्त माना जाता था।

शब्द स्निग्ध ("बहुत शांतिपूर्ण") और सु-स्निग्ध ("स्नेही") क्रमशः चौदहवीं और पंद्रहवीं कविताओं में उपयोग किए गए हैं, और वे श्रीमद- भागवतम (१.१.८) में भी पाए जाते हैं: ब्रूयुः स्निग्धस्य शिष्यस्य गुरवो गुह्यम अपि उता। "एक शिष्य जिसमें अपने आध्यात्मिक गुरु के लिए वास्तविक प्रेम होता है, आध्यात्मिक गुरु के आशीर्वाद से, सभी गोपनीय ज्ञान से संपन्न होता है।" श्रील श्रीधर स्वामी ने टिप्पणी की है कि स्निग्धस्य शब्द का अर्थ प्रेम-वत: है। प्रेम-वत: शब्द इंगित करता है कि किसी को अपने आध्यात्मिक गुरु से बहुत प्यार है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)