श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.17.13 
प्रभु कहे, - निज - सङ्गी काँहो ना लइब ।
एक - जने निले, आनेर मने दुःख हइब ॥13॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मैं अपने किसी भी पार्षद को अपने साथ नहीं ले जाऊंगा, क्योंकि यदि मैं किसी एक को चुनूंगा, तो बाकी सभी दुखी हो जाएंगे।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “I will not take any of my companions with me, because if I choose anyone, all the others will be unhappy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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