श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.17.129 
प्रभु कहे, - “मायावादी कृष्णे अपराधी ।
‘ब्रह्म’, ‘आत्मा, ‘चैतन्य’ कहे निरवधि ॥129॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "मायावादी निर्विशेषवादी भगवान कृष्ण के महान अपराधी हैं; इसलिए वे केवल 'ब्रह्म', 'आत्मा' और 'चैतन्य' शब्दों का उच्चारण करते हैं।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, "The Mayavadi impersonalists are the greatest offenders of Lord Krishna. That is why they simply pronounce the words 'Brahman,' 'Atman,' and 'Chaitanya.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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