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श्लोक 2.16.78  |
गदाधर - पण्डिते तेंहो पुनः मन्त्र दिल ।
ओड़न - षष्ठीर दिने यात्रा ये देखिल ॥78॥ |
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| अनुवाद |
| पुण्डरीक विद्यानिधि ने गदाधर पंडित को दूसरी बार दीक्षा दी, और ओडना-षष्ठी के दिन पुण्डरीक विद्यानिधि ने उत्सव देखा। |
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| Pundarik Vidyanidhi re-initiated Gadadhara Pandita and witnessed the celebrations on the day of Odanasashti. |
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