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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.16.56 
विस्ता रि’ वर्णियाछेन दास - वृन्दावन ।
श्रीवास प्रभुरे तबे कैल निमन्त्रण ॥56॥
 
 
अनुवाद
इन सभी प्रसंगों का श्रील वृन्दावनदास ठाकुर ने विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। फिर एक दिन श्रीवास ठाकुर ने भगवान को निमंत्रण दिया।
 
All these events have been described in detail by Srila Vrindavana Dasa Thakura. Then one day Srivasa Thakura invited Mahaprabhu.
तात्पर्य
चैतन्य भागवत (अंत्य खंड, नवा अध्याय) में निम्न कथन दिया है। एक दिन श्रील आदवैत आचार्य ने चैतन्य महाप्रभु को निमंत्रण देकर यह सोचा कि यदि भगवान अकेले पधारते हैं तो वह उन्हें खूब प्रसन्न करके अवश्य भोजन कराएंगे। तभी ऐसा हुआ कि जब दूसरे संन्यासी आदवैत आचार्य के यहाँ दोपहर का भोजन करने जा रहे थे, तब रास्ते में भारी वर्षा हो गई और वे उनके घर नहीं पहुँच पाए। इस तरह आदवैत आचार्य की इच्छा के अनुसार, श्री चैतन्य महाप्रभु अकेले पधारे और प्रसाद ग्रहण किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)