श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.16.56 
विस्ता रि’ वर्णियाछेन दास - वृन्दावन ।
श्रीवास प्रभुरे तबे कैल निमन्त्रण ॥56॥
 
 
अनुवाद
इन सभी प्रसंगों का श्रील वृन्दावनदास ठाकुर ने विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। फिर एक दिन श्रीवास ठाकुर ने भगवान को निमंत्रण दिया।
 
All these events have been described in detail by Srila Vrindavana Dasa Thakura. Then one day Srivasa Thakura invited Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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