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श्लोक 2.16.52  |
घट भ रि’ प्रभुर तेंहो अभिषेक कैल ।
ताँर अभिषेके प्रभु महा - तृप्त हैल ॥52॥ |
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| अनुवाद |
| कृष्णदास ने ही एक बड़ा घड़ा भरकर भगवान के स्नान करते समय उन पर जल उँडेला था। इससे भगवान बहुत प्रसन्न हुए। |
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| Krishna Das filled a large vessel with water and poured it over Mahaprabhu, bathing him. This pleased Mahaprabhu immensely. |
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