श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.16.52 
घट भ रि’ प्रभुर तेंहो अभिषेक कैल ।
ताँर अभिषेके प्रभु महा - तृप्त हैल ॥52॥
 
 
अनुवाद
कृष्णदास ने ही एक बड़ा घड़ा भरकर भगवान के स्नान करते समय उन पर जल उँडेला था। इससे भगवान बहुत प्रसन्न हुए।
 
Krishna Das filled a large vessel with water and poured it over Mahaprabhu, bathing him. This pleased Mahaprabhu immensely.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas