श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 250
 
 
श्लोक  2.16.250 
तबे नवद्वीपे ताँरे दिल पाठाञा ।
नीलाद्रि चलिला सङ्गे भक्त - गण ल ञा ॥250॥
 
 
अनुवाद
श्रीमती शचीदेवी को नवद्वीप वापस भेज दिया गया, और भगवान और उनके भक्त जगन्नाथ पुरी, नीलाद्रि के लिए चल पड़े।
 
Srimati Sachidevi was sent back to Navadvipa and Mahaprabhu along with his devotees left for Niladri i.e. Jagannath Puri.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)