श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 248
 
 
श्लोक  2.16.248 
ताहाँ हैते अवश्य आमि ‘वृन्दावन’ याब ।
सबे आज्ञा दे ह’, तबे निर्विघ्ने आसिब ॥248॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मैं जगन्नाथ पुरी से अवश्य वृंदावन जाऊँगा। यदि आप सभी मुझे अनुमति दें, तो मैं बिना किसी कठिनाई के पुनः यहाँ लौट आऊँगा।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "I will definitely go to Vrindavan from Jagannatha Puri. If you all give me permission, I will come here again without any difficulty."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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