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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 244
 
 
श्लोक  2.16.244 
देखि’ ताँर पिता - माता बड़ सुख पाइल ।
ताँहार आवरण किछु शिथिल हइल ॥244॥
 
 
अनुवाद
जब रघुनाथदास के माता-पिता ने देखा कि उनका पुत्र गृहस्थ व्यवहार कर रहा है, तो वे बहुत प्रसन्न हुए। इस कारण उन्होंने अपनी सतर्कता कम कर दी।
 
When Raghunath Das's parents saw that their son was living like a householder, they were overjoyed. Consequently, they relaxed their vigilance.
तात्पर्य
जब रघुनाथ दास के माता और पिता ने देखा कि उनका पुत्र अब पागल व्यक्ति के समान आचरण नहीं करता और वह उत्तरदायित्वपूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करता है, तो वह बहुत प्रसन्न हुए। ग्यारह व्यक्ति - पाँच पहरेदार, चार व्यक्तिगत नौकर और दो ब्राह्मण - जो उसकी रक्षा करते थे, अपनी चौकसी में कम सख्त हो गए। जब रघुनाथ दास वास्तव में अपने घरेलू मामलों को संभालने लगे, तो उनके माता-पिता ने पहरेदारों की संख्या कम कर दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)