vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा
»
श्लोक 231
श्लोक
2.16.231
एबे यदि महाप्रभु ‘शान्तिपुर’ आइला ।
शुनिया पितारे रघुनाथ निवेदिला ॥231॥
अनुवाद
जब रघुनाथदास को पता चला कि श्री चैतन्य महाप्रभु शांतिपुर में आ गए हैं, तो उन्होंने अपने पिता से अनुरोध किया।
When Raghunath Das came to know that Sri Chaitanya Mahaprabhu had come to Shantipur, he requested his father.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×