माधव - दास - गृहे तथा शचीर नन्दन ।
लक्ष - कोटि लोक तथा पाइल दरशन ॥208॥
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अनुवाद
जब भगवान माधवदास के घर पर ठहरे तो लाखों लोग उनसे मिलने आये।
When Mahaprabhu stayed at Madhavdas's house, millions and crores of people came to see him.
तात्पर्य
माधव दास की पहचान निम्नानुसार है। श्रीकर चट्टोपाध्याय के परिवार में युधिष्ठिर चट्टोपाध्याय ने जन्म लिया। पहले, वह और उनके परिवार के सदस्य बिल्वग्राम और पाटुली में रहते थे। वहीं से वह कुलिया-पाहाड़पुर, जिसे पहले पाडापुर के नाम से जाना जाता था, चले गए। युधिष्ठिर चट्टोपाध्याय के सबसे बड़े बेटे को माधव दास के नाम से जाना जाता था, दूसरे बेटे को हरिदास कहा जाता था, और सबसे छोटे बेटे को कृष्णसंपत्ति चट्टोपाध्याय कहा जाता था। तीनों भाइयों के उपनाम चाकडी, तिनकडी और दुकाडी थे। माधव दास के पोते का नाम वंशीवादा था, और श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर के समय में, उनके पोते रामचंद्र और उनके वंशज अभी भी बाघनापाड़ा या वैंची में रह रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥