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श्लोक 2.16.200  |
ताँरे विदाय दिल प्रभु सेइ ग्राम हैते ।
से - काले ताँर प्रेम - चेष्टा ना पारि वर्णिते ॥200॥ |
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| अनुवाद |
| अंत में श्री चैतन्य महाप्रभु ने राज्यपाल को विदाई दी। राज्यपाल के अतीन्द्रिय प्रेम का वर्णन नहीं किया जा सकता। |
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| Finally, Sri Chaitanya Mahaprabhu also bid farewell to the Governor. The Governor's affection is beyond description. |
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