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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.16.189 
गो - ब्राह्मण - वैष्णवे हिंसा कर्याछि अपार ।
सेइ पाप हइते मोर हडक निस्तार ॥189॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद मुस्लिम गवर्नर ने ब्राह्मणों और वैष्णवों से ईर्ष्या करने और गायों की हत्या करने के कारण उत्पन्न हुए असीमित पाप कर्मों से मुक्ति के लिए प्रार्थना की।
 
Then the Muslim governor prayed for his release from the consequences of the numerous sins he had previously committed by being jealous of Brahmins and Vaishnavas and killing cows.
तात्पर्य
श्रीकृष्ण और हरि के पवित्र नामों का जाप करने से, निश्चित रूप से गायों की हत्या या ब्राह्मणों और वैष्णवों का अपमान जैसी पापपूर्ण गतिविधियों की प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो जाता है। गायों को मारना और ब्राह्मणों और वैष्णवों का अपमान करना सबसे बड़ा पाप है। ऐसी गतिविधि से प्राप्त कर्म बहुत महान है, लेकिन व्यक्ति भगवान कृष्ण के प्रति समर्पण करके और उनके पवित्र नाम का जाप करके इस सभी कर्म को तुरंत रद्द कर सकता है। किसी के पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं (कर्म) से मुक्त होने के बाद, वह भगवान की सेवा करने के लिए उत्सुक हो जाता है। यह परीक्षा है। चूँकि मुस्लिम गवर्नर श्री चैतन्य महाप्रभु की उपस्थिति में तुरंत शुद्ध हो गया था, वह कृष्ण और हरि के नामों का उच्चारण कर सकता था। इसलिए वह कुछ सेवा करने के लिए उत्सुक था, और भगवान, उसकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उत्सुक थे, तुरंत भक्त मुकुंद दत्त से राज्यपाल को सूचित कर दिया कि कुछ सेवा करनी थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)