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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  2.16.188 
सेइ कहे , - ‘मोरे यदि कैला अङ्गीकार ।
एक आज्ञा देह, सेवा करि ये तोमार ॥188॥
 
 
अनुवाद
तब मुस्लिम गवर्नर ने कहा, "चूंकि आपने मुझे इतनी दयालुता से स्वीकार किया है, कृपया मुझे कुछ आदेश दें ताकि मैं आपकी कुछ सेवा कर सकूं।"
 
Then the Muslim Governor said, “Since you have kindly adopted me, please give me some orders so that I can serve you.”
तात्पर्य
यदि कोई श्री चैतन्य महाप्रभु के आदेशों का पालन करके शुद्ध हो जाता है - अर्थात, कृष्ण के पवित्र नाम का जप करके - निश्चित रूप से उसे प्रभु की सेवा करने के लिए उत्सुक होना चाहिए। यही कसौटी है। जब कोई प्रभु की सेवा में उत्साह से संलग्न होता है, तो यह समझा जाना चाहिए कि वह कृष्ण और हरि के नामों का जप करने के परिणाम प्राप्त कर रहा है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)