श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 185
 
 
श्लोक  2.16.185 
इँहार ये एइ गति, इथे कि विस्मय ? ।
तोमार दर्शन - प्रभाव एइ - मत ह य’ ॥185॥
 
 
अनुवाद
"इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इस मुस्लिम गवर्नर को ऐसी सफलता मिली है। आपके दर्शन मात्र से ही यह सब संभव है।"
 
"What wonder if this Muslim governor has achieved such success? All this is possible simply by your presence."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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