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श्लोक 2.16.185  |
इँहार ये एइ गति, इथे कि विस्मय ? ।
तोमार दर्शन - प्रभाव एइ - मत ह य’ ॥185॥ |
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| अनुवाद |
| "इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इस मुस्लिम गवर्नर को ऐसी सफलता मिली है। आपके दर्शन मात्र से ही यह सब संभव है।" |
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| "What wonder if this Muslim governor has achieved such success? All this is possible simply by your presence." |
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