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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  2.16.175 
आपने महाप्रभु ताँर मन फिराइल ।
दर्शन - स्मरणे याँर जगत्तारिल ॥175॥
 
 
अनुवाद
"यह अवश्य ही श्री चैतन्य महाप्रभु ही होंगे जिन्होंने मुसलमानों का मन बदला है। उनकी उपस्थिति और उनके स्मरण मात्र से ही सारा संसार मुक्त हो जाता है।"
 
"Sri Chaitanya Mahaprabhu himself must have changed this Muslim's heart. His mere presence and remembrance of him is enough to bring salvation to the entire world."
तात्पर्य
इससे हम यह समझ सकते हैं कि चूँकि मुस्लिम शासक शराबी (मद्यपा) था, तो साधारणतः उसकी बदलने की कोई संभावना नहीं होती। लेकिन भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु किसी का भी मन कृष्ण चेतना की ओर मोड़ सकते थे। सिर्फ श्री चैतन्य महाप्रभु के पवित्र नाम को याद करके या उनसे मिलने पर व्यक्ति को भौतिक अस्तित्व से मुक्त किया जा सकता है। यह कृष्ण चेतना आन्दोलन पूरे विश्व में फैलाया जा रहा है, लेकिन बिना श्री चैतन्य महाप्रभु की कृपा के कोई यवन या शराब के आदी म्लेच्छ भी कृष्ण चेतना को स्वीकार करके नहीं बदल सकते थे। अक्सर लोग हजारों पश्चिमी लोगों को वैष्णववाद में परिवर्तित होते देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। सामान्यतः पश्चिमी लोग मांसाहार, शराब, जुआ और अवैध यौन सम्बन्धों के आदी होते हैं। इसलिए कृष्ण चेतना को ग्रहण करना उनके लिए आश्चर्यजनक है। भारत में विशेष रूप से इसे लेकर काफी आश्चर्य है। हालाँकि, इसका उत्तर यहाँ दिया गया है: दर्शन-स्मरणे यांग्र जगत् तारिला। यह परिवर्तन सिर्फ श्री चैतन्य महाप्रभु के स्मरण द्वारा संभव है। पश्चिमी भक्तगण श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके सहयोगियों के पवित्र नामों का बहुत ही ईमानदारी से जाप कर रहे हैं: श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु-नित्यानंद श्री-अद्वैत गदाधर श्रीवासादि-गौर-भक्त-वृंद। श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके सहयोगियों की कृपा से लोग पवित्र हो रहे हैं और उनकी चेतना माया से कृष्ण की ओर निर्देशित हो रही है।

विश्वास शब्द एक सचिव को दर्शाता है। यह उपाधि सामान्यतः हिन्दू समुदाय में कायस्थ जाति में पाई जाती है। बंगाल में, विश्वास उपाधि का प्रयोग आज भी कायस्थ करते हैं। विश्वास शब्द का अर्थ है 'विश्वसनीय', और एक विश्वासी वह व्यक्ति होता है जिस पर कोई विश्वास कर सकता है। श्री भक्ति विनोद ठाकुर बताते हैं कि बंगाल में मुस्लिम शासन के दौरान, विश्वास-खाना नामक एक सचिवालय होता था। विश्वास-खाना कार्यालय एक सचिवालय कार्यालय होता था जिसमें सिर्फ सबसे अधिक विश्वसनीय लोगों को नियुक्त किया जाता था। वे कायस्थ समुदाय से चुने जाते थे, जो कि एक ऐसा समुदाय है जो अभी भी व्यापार और सरकारी मामलों के प्रबंधन में बहुत अधिक निपुण है। सचिवालय या विश्वास-खाना आम तौर पर एक बहुत ही विश्वसनीय और वफादार सेवक होता है। जब भी किसी गोपनीय सेवा की जरूरत पड़ती थी, तो इन अधिकारियों को नियुक्त किया जाता था।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)