श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  2.16.174 
शुनि’ महा - पात्र कहे ह ञा विस्मय ।
‘मद्यप झवनेर चित्त ऐछे के करय! ॥174॥
 
 
अनुवाद
यह प्रस्ताव सुनकर उड़ीसा सरकार के प्रतिनिधि महापात्र को बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने सोचा, "मुस्लिम गवर्नर तो शराबी है। उसका मन किसने बदल दिया?"
 
Mahapatra, the representative of the Orissa government, was astonished to hear this proposal. He thought, “This Muslim governor is a drunkard. Who changed his mind?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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