श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  2.16.139 
‘प्रतिज्ञा’, ‘सेवा’ छाड़िबे , - ए तोमार ‘उद्देश’ ।
से सिद्ध हइल - छाड़ि’ आइला दूर देश ॥139॥
 
 
अनुवाद
"तुमने गोपीनाथ की सेवा त्याग दी है और पुरी में रहने का अपना व्रत तोड़ दिया है। अब यह सब पूरा हो गया है क्योंकि तुम इतनी दूर आ गए हो।"
 
"You have left Gopinath's service and broken your vow to stay in Puri. Since you have come this far, all that is now complete.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)