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अनुवाद
जब गदाधर पंडित भगवान के साथ जाने लगे, तो उन्हें आने से मना कर दिया गया और क्षेत्र-संन्यास का व्रत न छोड़ने के लिए कहा गया।
When Gadadhara Pandita was ready to go with Mahaprabhu, he was refused and told not to abandon his vow of Kshetra-Sanyas.
तात्पर्य
जब कोई व्यक्ति क्षेत्र-संन्यास लेता है, तो वह अपने गृहस्थ जीवन को छोड़कर भगवान विष्णु को समर्पित किसी तीर्थ स्थान पर चला जाता है। ऐसे स्थानों में पुरुषोत्तम (जगन्नाथ पुरी), नवद्वीप-धाम और मथुरा-धाम शामिल हैं। क्षेत्र-संन्यासी इन स्थानों पर अकेले या अपने परिवार के साथ रहता है। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर इस कलयुग में क्षेत्र-संन्यास को वानप्रस्थ स्थिति से श्रेष्ठ मानते हैं। सर्वभौम भट्टाचार्य इसी प्रकार रहते थे, और उन्हें एक क्षेत्र-संन्यासी – अर्थात्, जगन्नाथ पुरी में रहने वाले एक संन्यासी – कहा गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥