श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.15.82 
पण्डित कहे , - द्वारे लोक करे गतायाते ।
तार पद - धूलि उड़ि’ लागे उपर भिते ॥82॥
 
 
अनुवाद
राघव पंडित ने तब कहा, 'लोग हमेशा उस दरवाज़े से आते-जाते रहते हैं। उनके पैरों की धूल उड़कर छत को छूती है।'
 
"Then Raghav Pandit said, 'People constantly come and go through this door. The dust from their feet flies and touches the ceiling.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas