श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.15.60 
किबा मोर कथाय मने भ्रम ह ञा गेल! ।
किबा कोन जन्तु आसि’ सकल खाइल ? ॥60॥
 
 
अनुवाद
"वह सोचने लगी कि क्या वाकई थाली में कुछ था भी। फिर उसने सोचा कि शायद कोई जानवर आकर सब कुछ खा गया होगा।"
 
"She wondered if there was any food on the plate at all. Then she thought maybe some animal had come and eaten it all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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