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श्लोक 2.15.60  |
किबा मोर कथाय मने भ्रम ह ञा गेल! ।
किबा कोन जन्तु आसि’ सकल खाइल ? ॥60॥ |
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| अनुवाद |
| "वह सोचने लगी कि क्या वाकई थाली में कुछ था भी। फिर उसने सोचा कि शायद कोई जानवर आकर सब कुछ खा गया होगा।" |
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| "She wondered if there was any food on the plate at all. Then she thought maybe some animal had come and eaten it all. |
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