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श्लोक 2.15.301  |
श्रद्धा क रि’ एइ लीला शुने येइ जन ।
अचिरात्याय सेइ चैतन्य - चरण ॥301॥ |
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| अनुवाद |
| जो कोई भी श्री चैतन्य महाप्रभु की इन लीलाओं को श्रद्धा और प्रेम के साथ सुनेगा, वह शीघ्र ही भगवान के चरणकमलों की शरण प्राप्त कर लेगा। |
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| Whoever listens to these pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu with devotion and love will immediately find refuge at the feet of Mahaprabhu. |
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