vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना
»
श्लोक 301
श्लोक
2.15.301
श्रद्धा क रि’ एइ लीला शुने येइ जन ।
अचिरात्याय सेइ चैतन्य - चरण ॥301॥
अनुवाद
जो कोई भी श्री चैतन्य महाप्रभु की इन लीलाओं को श्रद्धा और प्रेम के साथ सुनेगा, वह शीघ्र ही भगवान के चरणकमलों की शरण प्राप्त कर लेगा।
Whoever listens to these pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu with devotion and love will immediately find refuge at the feet of Mahaprabhu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×