श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.15.28 
बहु - मूल्य वस्त्र प्रभु - मस्तके बान्धिल ।
आचार्यादि प्रभुर गणेरे पराइल ॥28॥
 
 
अनुवाद
यह बहुमूल्य वस्त्र श्री चैतन्य महाप्रभु के सिर पर लपेटा गया था। अद्वैत आचार्य सहित अन्य भक्तों ने भी अपने सिर पर वस्त्र लपेटे हुए थे।
 
This precious cloth was draped around Sri Chaitanya Mahaprabhu's head. Other devotees, including Advaita Acharya, also wrapped similar cloths around their heads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)