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श्लोक 274
श्लोक
2.15.274
सहजे निर्मल एइ ‘ब्राह्मण” - हृदय ।
कृष्णेर वसिते एइ योग्य - स्थान हय ॥274॥
अनुवाद
“ब्राह्मण का हृदय स्वभावतः अत्यन्त स्वच्छ होता है; अतः वह कृष्ण के बैठने के लिए उचित स्थान है।
“The heart of a Brahmin is naturally pure, so it is a suitable place for Krishna to reside.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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