श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 272
 
 
श्लोक  2.15.272 
आचार्य कहे , - उपवास कैल दुइ जन ।
विसूचिका - व्याधिते अमोघ छाड़िछे जीवन ॥272॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य ने भगवान को बताया कि पति-पत्नी दोनों उपवास कर रहे हैं और उनका दामाद अमोघ हैजा से मर रहा है।
 
Gopinath Acharya told Mahaprabhu that both husband and wife were fasting and his son-in-law was dying of incurable cholera.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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