'हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिकों को इकट्ठा करके हमें जो व्यवस्था करनी पड़ी थी, वह गंधर्वों ने पहले ही पूरी कर ली है।'
“The task which we would have had to accomplish with great effort by gathering elephants, horses, chariots and foot soldiers, has already been accomplished by the Gandharvas.”
तात्पर्य
यह महाभारत (वन-पर्व २४१.१५) का उद्धरण है। भीमसेन ने यह कथन किया था, जब सभी पाण्डव वन में वनवास काल बिता रहे थे। उस समय कौरवों और गंधर्वों के बीच युद्ध हुआ था। कौरव सेना का नेतृत्व कर्ण कर रहा था, लेकिन गंधर्वों का सेनापति अपनी श्रेष्ठ सैन्य शक्ति के आधार पर सभी कौरवों को बंदी बना लेने में सफल हो गया। उस समय दुर्योधन के मंत्रियों और सेनापतियों ने महाराज युधिष्ठिर से सहायता की गुहार लगाई। इस प्रकार विनती किए जाने के पश्चात् भीमसेन ने, दुर्योधन के पूर्व में उनके विरुद्ध किए गए घृणित और अत्याचारी कृत्यों को स्मरण करते हुए, उपर्युक्त श्लोक का उच्चारण किया। वास्तव में, भीमसेन का यह विचार बिल्कुल उचित था कि दुर्योधन और उसके साथियों को बंदी बना लिया गया। यह कार्य पाण्डवों द्वारा महान प्रयास के पश्चात् ही साध्य हो सकता था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)