श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 266
 
 
श्लोक  2.15.266 
सेइ रात्रे अमोघ काहाँ पलाञा गेल ।
प्रातः - काले तार विसूचिका - व्याधि हैल ॥266॥
 
 
अनुवाद
उस रात सार्वभौम भट्टाचार्य के दामाद अमोघ भाग गये और सुबह होते ही वे हैजा से बीमार पड़ गये।
 
That night, Sarvabhauma Bhattacharya's son-in-law, Amogha, ran away and in the morning he fell ill with cholera.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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