सन्तुष्टालोपुला दक्ष धर्म-ज्ञा प्रिय-सत्य-वाक्
अप्रमत्ता शुचिः स्निग्धा पतिं त्व अपतितं भजेत्
''एक पत्नी जो संतुष्ट है, जो लालची नहीं है, जो निपुण है और धार्मिक सिद्धांतों को जानती है, जो प्रिय और सत्य बोलती है और भ्रमित नहीं होती है, और जो हमेशा स्वच्छ और स्नेही होती है, उसे अपने पति के प्रति बहुत समर्पित होना चाहिए यदि वह पतित नहीं है।''
