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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 241
 
 
श्लोक  2.15.241 
व्रजे ज्येठा, खुड़ा, मामा, पिसादि गोप - गण ।
सखा - वृन्द सबार घरे द्विसन्ध्या - भोजन ॥241॥
 
 
अनुवाद
"वृन्दावन में आपके पिता के बड़े भाई, आपके पिता के छोटे भाई, मामा, आपकी चचेरी बहनों के पति और कई ग्वाल-बाल भी रहते हैं। ग्वाल-बाल भी हैं, और आप दिन में दो बार, सुबह और शाम, हर एक के घर भोजन करते हैं।"
 
"You also have uncles, paternal uncles, maternal uncles, and many cowherds in Vrindavan. You also have cowherd friends there, and you eat twice a day in their homes, morning and evening."
तात्पर्य
द्वारका में भगवान कृष्ण की अठारह माताएँ थीं - देवकी, रोहिणी एवं अन्य। इसके अतिरिक्त वृन्दावन में उनकी पालन-हारी माता यशोदा भी थीं। भगवान कृष्ण के कई चाचा भी थे। जैसा कि श्रील रूप गोस्वामी ने अपने बृहत् श्री श्री राधा-कृष्ण-गणोद्देश-दीपिका (32) में कहा है: उपनन्दो ऽभिनन्दश्च पितृव्यौ पूर्वजौ पितुः: "नन्द महाराज के बड़े भाई उपनन्द और अभिनन्द थे।" इसी प्रकार, उसी श्लोक में नन्द महाराज के छोटे भाइयों के नाम दिए गए हैं: पितृव्यौ तु कनीयांस्यां स्यातां सन्नन्द-नन्दनौ। "सन्नन्द और नन्दन [जिन्हें सुनन्द और पाण्डव भी कहा जाता है] नन्द महाराज के पिता, श्री कृष्ण के चाचा थे।" इस पुस्तक (श्लोक 46) में श्री कृष्ण के मामाओं का भी वर्णन किया गया है: यशोधर-यशोदेव-सुदेवाद्यास्तु मातुलाः। "यशोधर, यशोदेव और सुदेव कृष्ण के मामा थे।" राधा-कृष्ण-गणोद्देश-दीपिका (38) में कृष्ण के उन चचाओं का भी उल्लेख है जो नन्द महाराज की बहनों के पति थे: महानीलः सुनीलश्च रमणाव एतयोः क्रमः। "महानील और सुनील, कृष्ण की आंटियों के पति हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)